भक्ताम्बर महामंडल विधान श्रद्धा और विधि-विधान के साथ संपन्न

अभिषेक, शांतिधारा, अर्घ्य समर्पण और संगीतमय पाठ से हुआ पुण्यार्जन

कोटा। परम पूज्य भारत गौरव गणिनी आर्यिका शिरोमणि 105 श्री विशुद्ध मति माताजी एवं प्रज्ञा पद्मिनी पट्ट गणिनी आर्यिका 105 श्री विज्ञ मति माताजी ससंघ के पावन सानिध्य एवं आशीर्वाद में रविवार को तलवंडी स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में श्री भक्ताम्बर महामंडल विधान विधि-विधानपूर्वक, श्रद्धा और भक्ति भाव से संपन्न हुआ।
प्रातःकाल श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा के साथ विधान की विधिवत शुरुआत की गई। इसके पश्चात भक्ताम्बर विधान आरंभ हुआ, जिसमें भक्तामर स्तोत्र के प्रत्येक श्लोक के साथ अर्घ्य समर्पण किया गया। विधान के अंतर्गत कुल 48 अर्घ्य समर्पित किए गए, जो भक्तामर स्तोत्र के 48 श्लोकों का प्रतीक हैं।
जे के जैन ने बताया कि विधान की प्रक्रिया के अनुसार प्रत्येक अर्घ्य के समय देवाधिदेव की स्तुति, मंत्रोच्चार एवं संगीतमय पाठ किया गया। भक्तामर स्तोत्र का सामूहिक, लयबद्ध और भावपूर्ण गायन वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भरता रहा। इस दौरान देव, शास्त्र एवं गुरु की विधिवत पूजा-अर्चना कर श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ अर्जित किया।
प्रातः 9 बजे से पूज्य आर्यिका 105 श्री विज्ञ मति माताजी माताजी ससंघ के प्रवचन हुए, जिसमें उन्होंने भक्तामर विधान के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह विधान आत्मशुद्धि, संकट निवारण और आत्मकल्याण का प्रभावशाली साधन है। कार्यक्रम का आयोजन माँ विशुद्ध सभागार, तलवंडी जैन मंदिर धर्मशाला प्रांगण में किया गया। विधान में बड़ी संख्या में समाजजनों ने सहभागिता कर पुण्यार्जन किया।
इस पुण्यार्जक विधान में पुष्पा–जे.के. जैन, बरखा–प्रवीण जैन, वर्षा–निकुंज जैन, ऋतु–विकास जैन तथा मेघा–प्रेक्षु जैन परिवार द्वारा विशेष अर्घ्य समर्पण किया गया।
इस अवसर पर सकल जैन समाज के संरक्षक राजमल पाटौदी, विमल जैन (नांता), अध्यक्ष प्रकाश बज, कार्याध्यक्ष जे.के. जैन, धर्मचंद काला, महावीर जैन मास्टर साहब, देवेन्द्र टोंग्या, मंदिर अध्यक्ष अशोक पहाड़िया, मंत्री प्रकाश सामरिया सहित अनेक गणमान्यजन एवं समाजबंधु उपस्थित रहे।

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