पंच परमेष्ठी की शरण ही मोक्ष मार्ग—आर्यिका विभाश्री माताजी

कोटा। श्री 1008 मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन मंदिर, त्रिकाल चौबीसी परिसर, आर.के.पुरम के तत्वावधान में आयोजित सिद्धचक्र महामंडल विधान में श्रद्धालुओं ने गहन आस्था के साथ अर्घ अर्पित कर धर्मलाभ अर्जित किया। मंदिर परिसर दिनभर मंत्रोच्चार, अभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों से गुंजायमान रहा।
आयोजन परम पूज्य गणिनी आर्यिका श्री 105 विभाश्री माताजी एवं आर्यिका श्री 105 विनयश्री माताजी (ससंघ, 12 पिच्छी) के मंगल सान्निध्य में संपन्न हो रहा है। समिति उपाध्यक्ष लोकेश जैन बरमुंडा ने बताया कि कांग्रेस जिलाध्यक्ष राखी गौत्तम ने गुरूमां के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा वंदना करते हुए कहा कि जैन धर्म सत्य और अहिंसा की राह दिखाता है, जिसकी आवश्यकता आज पूरे विश्व को है।
मंदिर अध्यक्ष अंकित जैन ने बताया कि प्रातः 6 बजे से मंत्रजाप, सहस्त्रनाम धारा, अभिषेक, शांतिधारा एवं विधान सहित विविध अनुष्ठान विधिपूर्वक संपन्न हुए। निर्देशक विनोद टोरड़ी ने बताया कि पाद प्रक्षालन का सौभाग्य शांतिदेवी, विनय–कल्पना सेठिया को प्राप्त हुआ। चित्र अनावरण, शास्त्र भेंट व दीप प्रज्वलन दिनेश जैन (तलवंडी) द्वारा किया गया, जबकि समवशरण के श्रेष्ठि परिवार पदमा, राजकुमारी, शिखा खटोड़ परिवार रहे।
धर्मसभा में आर्यिका श्री 105 विभाश्री माताजी ने प्रवचन देते हुए कहा कि देव, शास्त्र, गुरु और पंच परमेष्ठी ही वास्तविक शरण हैं। मनुष्य के अपने परिणाम ही उसके सुख-दुख के कारण बनते हैं। धर्म जीवन को आलोकित कर वर्तमान और परलोक दोनों को सुखमय बनाता है।
सभा में अध्यक्ष अंकित जैन, संयोजक पदम जैन दुगरिया, कार्याध्यक्ष प्रकाश सेठिया, मुकेश पापड़ीवाल, अक्षय जैन, संजय जैन सहित अनेक गणमान्य सदस्य एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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